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फलों का नया बाग लगाने का वैज्ञानिक तरीका

फलो का बाग (बगीचा) लगाते समय सबसे आवश्यक कार्य दूरी की माप करने का होता है दूरी नापते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रत्येक पौधे को विकसित होने व पनपने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।

बाग में फलो के पौधे लगाने की कुछ मुख्य विधियां इस प्रकार हैं

वर्गाकार विधि : इस विधि के अनुसार वर्ग के प्रत्येक कोने पर पौधे लगाए जाते हैं पौधो की मात्रा के अनुसार वर्ग का आकार रखा जाता है यह अत्यधिक सरल व प्रचलित विधि है।

आयताकार विधि :  इस विधि के अनुसार पंक्तियों में पौधरोपण किया जाता है, पौधे से पौधे की दूरी अधिक रखी जाती है।

पूरक या पंचवृक्ष विधि : यह विधि वर्गाकार की तरह ही होती है लेकिन वर्ग के बीच में एक ऐसे पौधे का रोपण किया जाता है जिसकी आयु कम होती है और बगीचे के स्थाई पौधो की आयु की युवावस्था आने से पहले ही फल देकर अपना जीवन समाप्त कर देता है।

त्रिभुजाकार विधि : किस विधि में सभी पौधे वर्गाकार विधि में ही लगाए जाते हैं किंतु दूसरी, चौथी, छठी सम पंक्ति और ऐसे की पहली, तीसरी, पांचवी, विषम पंक्तियों में पौधारोपण किया जाता है यह विधि थोड़ी कठिन होती है।

षटभुजाकार विधि : समत्रिबाहु त्रिभुज के आकार में इस विधि में पौधरोपण किया जाता है षट्भुज के आकार में 6 पौधे लगाए जाते हैं और एक पौधा बीच मध्य में लगाया जाता है इस विधि में वर्गाकार विधि की अपेक्षा 15% पौधे अधिक रोपे जा सकते हैं।

कंटूर विधि : जहां भूमि समतल नहीं होती है पौधे सीधी पंक्ति में नहीं लगाए जा सकते हैं ऐसे स्थानों पर समोच्च रेखा के अनुसार ही पौधरोपण किया जा सकता है ऐसी अवस्था में पौधोसे पौधो की दूरी समान नहीं रखी जा सकती।

phalo evan phulo ke jhadne ki samasya

फलो का बाग (बगीचा) लगाने का उचित समय 

पौधरोपण का उचित समय वर्षा ऋतु है मौसम की जानकारी लेते रहे क्योकि पहली अच्छी बरसात के बाद ही पौधो को लगा देना चाहिए, वर्षा ऋतु में वायुमंडल में नमी होने के कारण पौधे शीघ्र पनपने लगते हैं और अधिक सिंचाई की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है।

बाग (बगीचा) में पौधे लगाने संबंधित महत्वपूर्ण सावधानियां 

  • पौधे लगाते समय जिस प्लास्टिक बैग में पौधा खरीद कर लाए गए हैं उस पैकिंग को सावधानी पूर्वक बिना जड़ो को नुकसान पुचाये हटा लेना चाहिए
  • पौधे लगाने के बाद मिट्टी को चारों ओर से अच्छी तरह से दबा देना चाहिए 
  • मिट्टी को रोपित जगह में थोड़ी उठी हुई रखें जिससे पानी तने को ना छुपाए
  • आवश्यक खाद एवं उर्वरक समय-समय पर देते रहें छोटे पोधो में रसायनिक खाद के बजये वर्मीकम्पोस्ट अथवा गोबर खाद का प्रयोग करे
  • दीमक, फंगस एवं अन्य किट-पतंगों से बचाव हेतु निरिक्षण करते रहे
     
  • पर्याप्त मात्रा में सिंचाई करते रहें 
  • जहां तक संभव हो सायंकाल में पौधारोपण करें

पौधों का चुनाव 

  • उचित पौधों का चुनाव पौधरोपण के लिए किया जाना चाहिए
  • कम से कम पौधों की उम्र 1 वर्ष होना चाहिए
  • पौधे अच्छी किस्म के लेना चाहिए
  • साथ ही विश्वसनीय नर्सरी से क्रय किए जाने चाहिए
  • पौधे किसी भी प्रकार के रोग से ग्रसित नहीं होना चाहिए 
  • पौधे सामान्यतः एक तने वाले सीधे कम ऊंचाई व फैले हुए अच्छी गुणवत्ता वाले रहना चाहिए 
  • यदि पौधे नर्सरी से बिना प्लास्टिक बैग वाले लाए गए हो तो उनकी जड़ों में पर्याप्त मिट्टी होना चाहिए

फल वृक्षों के पोधो के बिच का अंतर व गड्ढों का आकर

फलदुरी (फीट) गड्ढों का आकर (फीट)
केला61.5 x 1.5 x 1.5
पपीता 6-81.5 x 1.5 x 1.5
करौंदा 6-101.5 x 1.5 x 1.5
अनार 152.5 x 2.5 x 2.5
नींबू 15-202.5 x 2.5 x 2.5
संतरा 15-202.5 x 2.5 x 2.5
मौसंबी 202.5 x 2.5 x 2.5
आंवला 253 x 3 x 3 
बेर 253 x 3 x 3 
लीची 253 x 3 x 3 
आम 303 x 3 x 3 
कटहल303 x 3 x 3 

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