Important Soybean variety | सोयाबीन की प्रमुख किस्में।

वैज्ञानिकों एवं किसानों के यहाँ तकनीकी एवं व्यवहारिक दृष्टि से परखी गई श्रेष्ठ किस्म (Important Soybean variety) एवं जातियों का विवरण निम्नानुसार है।

1. सोयाबीन किस्म जे.एस. 9560 (JS 9560)

कई वर्षों से किसान इस बात से परेशान थे कि एक अच्छी प्रामाणिक अर्ली सोयाबीन किस्म में उनके पास कोई बेहतर विकल्प नहीं था। किसानों की इस अपेक्षा को देर से ही सही किंतु वर्षों के गहन अनुसंधान के पश्चात् जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (J.N.K.V.V.) म.प्र. द्वारा भारत में पहली अतिशीघ्र पकने वाली अन्य सभी किस्म जे.एस. 9560 विकसित की गई है। यह हाल ही में जारी सोयाबीन किस्म जे. एस. 9305 से भी लगभग 8-10 दिन पूर्व में पक कर तैयार हो जाती है तथा इसकी उत्पादन क्षमता एवं गुण शीघ्र पकने वाली अन्य सभी किस्मों की तुलना में सर्वाधिक है। सम्राट एवं अन्य पूर्व में प्रचलित शीघ्र पकने वाली किस्मों जिसमें कई समस्याऐं-कीट का प्रकोप अधिक होने के कारण उत्पादन ठीक से प्राप्त नहीं हो पा रहा था इसको विस्थापित करने में एक आदर्श विकल्प के रूप में यह किस्म शीघ्र ही किसानों में अपना स्थान बना लेगी।

आलू-प्याज, लहसुन, मटर, डालर चना, शरबती गेहुँ आति अगाति फसल लेने वाले किसानों के लिए सोयाबीन की यह किस्म अर्ली चमत्कारी किस्म वरदान सिद्ध होगी। तीखी-सकरी (भालाकार) पत्तियाँ होने के कारण एवं कॉम्पेक्य/ सघन प्लांट होने, शाखाएं बहुत अधिक न होने के कारण हवा-प्रकाश एवं पौध संरक्षण औषधि छिड़काव के समय नीचे तक आसानी से पहुँचते हैं। जिससे कीट व्याधि नियंत्रण अधिक आसान एवं काफी प्रभावशाली रहता है।

आखरी पानी न गिरने यादेरी से पानी गिरते रहने, दोनों परिस्थितियों में समायोजन कर उच्च उत्पादन क्षमता वाली कीटव्याधि प्रतिरोधकता वाली यह किस्म शीघ्रपकने, सीधे बढ़ने के गुण के कारण यह किस्म मिश्र या अन्तवर्तीय फसल पद्धति के लिये एकदम उपयुक्त किस्म है। साथ ही सघनफसल चक्र के लिये जैसे सोया-आलू-लेट गेहुँ, सोया-मटर-लेट गेहुँ, सोया-लहसुन-प्याज यह किस्म सबसे बेहतर सोया किस्म है।

इसजाति में जल्दी कटाई होने के गुण के कारण खेत में उपलब्ध वर्षाकाल की नमी का उपयोग करते हुए, असिंचित अवस्था में भी रबी फसलों की सूखा निरोधक किस्में ली जा सकती हैं। साथ ही जल्दी कटाई के कारण खेत खाली होने की स्थिति में अगाती (अर्ली) रबी की फसलें आलू-प्याज-लहसुन-मटर-सुजाता गेहुँ, डॉलर चना लेने वाले किसानों के लिये यह किस्म एक आदर्श विकल्प है।

जिससे किसानों के लिये इन फसलों में कीटों का प्रबंधन अब अधिक आसान एवं सुविधाजनक हो जावेगा तथा सोयाबीन एवं आगे की अगाति रबी फसलों का उत्पादन भी जल्दी प्राप्त होने से मंडी में उसे जल्दी विक्रय कर किसान मंडी में उच्चतम भावों का लाभ ले सकते हैं।

इस (soybean variety) में बीज दर 80 किलो प्रति हेक्टेयर एवं कतार से कतार की दूरी 30 से.मी. (1 फीट) रखने पर अधिकतम उत्पादन लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक फसल की अवधि कम होते हुए भी आदर्श परिस्थितियों में देने की क्षमता इस किस्म में है। इस किस्म में खरपतवार नियंत्रण खेतों में पानी भरने की स्थिति (वॉटर लागिंग) न हो इसका पूरा ध्यान रखें।

ड्रेनेज मेनेजमेंट चेनल पतली नालियाँ निकालकर इसे नियंत्रित करें तथा दाना भरने की अवस्था में अधिकतम उत्पादन लेने हेतु इस किस्म में उचित नमी बनी रहना आवश्यक है। वर्षा में अधिक विलम्ब की दशा में सिंचाई की व्यवस्था शीघ्र करें। बोनी के समय सीड ड्रिल के समय पावड़ी का उपयोग अवश्य करें।

जे.एस. 9560 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (soybean variety JS 9560): दाने का आकार अण्डाकार, बोल्ड, नाभिका (हायलम) हल्का भूरा (धूसर), दाने का रंग पीला, चमकदार, 100 दानों का वज़न 13-15 ग्राम, अंकुरण क्षमता 85-90 प्रतिशत, पौधेका प्रकार बौनी किस्म, ऊँचाई-45-50 से.मी, पत्ती का रंग गहरा हरा, रोएँ तने, पत्तियाँ, फली, चिकनी, रोएँदार नहीं, आधे फूल आने की अवधि 30 दिवस, फूलों का रंग नीला, फली कर रंग गहरा भूरा, फली का प्रकार 3-4 दानों की फलियाँ व 4 दानों की फलियाँ 25-30 प्रतिशत, फली चटकने की समस्या नहीं, आदर्श पौध संख्या 6 लाख पौधे प्रति हेक्टेयर, अधिकतम उत्पादन क्षमता 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर व्यावहारिक रूप से आदर्श परिस्थितियों में, फसल की अवधि 85-88 दिवस, रोग जड सडन एवं पर्णीय बिमारियों के प्रति रोधी क्षमता/ सहनशीलता, कीटरोधक क्षमता पत्ती चूसने वाले कीट, पत्ती काटने वाले कीटों के प्रति रोधी क्षमता/ सहनशीलता।

2. सोयाबीन किस्म जे.एस. 2034 (JS 2034)

विगत कई वर्षों में देर से वर्षा, बाद में अवर्षा की स्थिति में रबी में अगाती फसलों डॉलर एवं देसी चना, आलू, मटर, लहसुन-प्याज, शरबति गेहूँ लगाने वाले किसान, बिजली संकट से जूझ रहे किसान खेती में बढ़ते हुए खर्चों को देखते हुए अधिकतम पतिफल (आउटपुट) निकालने हेतु तीन फसल लेने की योजना का समायोजन करने हेतु, कृषकों का आकर्षण अर्ली (जल्दी) आने वाली किस्म की तरफ बढ़ता जा रहा है.

कई वर्षो से किसान इस बात से परेशन थे की एक अछि प्रमाणिक अर्ली सोयाबीन किस्म में उन के पास जे.एस. 9560 किस्म के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं था किन्तु वर्षो के गहन अनुसंधान के पश्चात जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविधालय J.N.K.V.V. मध्य प्रदेश द्वारा भारत में दुसरु अतिशीघ्र पकने वाली उन्नत सोयाबीन किस्म जे. एस. 2034 जारी की है। जिसका नोटिफिकेशन क्रमांक एस.  ओ. 1146 (E) दिनांक 24.04.2014 है जो की देश के मध्यक्षेत्र मध्यप्रदेश, राजस्थान, महारष्ट्र, हेतु अनुशंसित है। 


यह किस्म जे.एस. 9560 के लगभग व जे.एस. 9305 से लगभग 8-10 दिन पूर्व पककर तैयार हो जाती है। उत्पादन क्षमता एवं गुण शीघ्र पकने वाली अन्य सोयाबीन किस्मों की तुलना में सर्वाधिक है सम्राट एवं पूर्व में प्रचलित शीघ्र पकने वाली अन्य जिसमें कीट व्याधि का अत्यधिक प्रकोप निरंतर गिरती उत्पादन क्षमता के कारण उत्पादन ठीक प्राप्त नहीं हो रहा था इसको व्यवस्था पिक करके एक आदर्श विकल्प के रूप में यह किस्म की कृषि अपना एक उचित स्थान किसानों में बना चुकी लेगी।

गोल अंडाकार पत्तियां होने के कारण कॉम्पेक्ट या सगन प्लांट होने से शाखाएं बहुत अधिक न होने के कारण हवा प्रकाश एवं पौध संरक्षण औषधि छिड़काव के समय नीचे तक आसानी से पहुंचते हैं जिससे कीट-व्याधि नियंत्रण अधिक आसानी एवं प्रभावशाली रहता है देरी से बोनी होने आखरी पानी ना गिरने या देरी तक गिरते रहने इन सभी परिस्थितियों में समायोजन कर उचित उत्पादन क्षमता वाली कीट व्याधि हेतु सहनशील बहू रोधी क्षमता वाली शीघ्र पकने वाली सीधी बढ़ने वाले गुणों के कारण मित्र एवं अन्तवर्तीय फसल पद्धति के लिए मध्यम व भारी जमीनों तथा मध्यम से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए यह एकदम उपयुक्त किस्म है साथ ही बहू फसल चक्र सोया-आलू-लेट गेहूं या सोया-मटर-लेट गेहूं या सोया-लहसुन-प्याज आदि के लिए यह एक अत्यंत उपयोगी सोया किस्म है।

सामान्य सोयाबीन किस्मों को आलू, प्याज, लहसुन के खेतों में लगाने पर जो कि अधिक खाद होने के कारण काफी उर्वरा शक्ति वाले होते हैं जिसके कारण सोयाबीन की वानस्पतिक वृद्धि काफी (Over Vegitative Growth) अधिक होती है किन्तु इस किस्म के विशेष गुण के कारण इस किस्म के पौधों की वृद्धि अधिक नहीं होती है, जिससे अधिक प्राप्त होने वाले तत्वों (Nutrients) का रूपान्तरण एवं प्रवाह पूरी तरह से पौधे की वानस्पतिक वृद्धि की ओर न जाकर फलियाँ / दाने की तरफ अधिक जाता है, परिणास्वरूप इस किस्म में अधिकतम उत्पादन प्राप्त होता है।

इस (soybean variety) में जल्दी कटाई होने के गुण के कारण खेत में उपलब्ध वर्षा काल की नमी का उपयोग करते हुए असिंचित अवस्था में भी रबी फसलों की सुखा निरोधक किस्मों का भी उत्पादन लिया जा सकता है। साथ ही जल्दी कटाई होने के कारण खेत खाली होने की स्थिति में अगाती (अर्ली) रबी की फसलें लहसुन – आलू – प्याज, मटर, चना, डालर चना, शरबती गेहुँ लेने वाले किसानों के लिये यह किस्म एक आदर्श विकल्प है। इससे किसानों का फसल चक्र प्रबंधन अधिक आसान एवं सुविधाजनक हो जावेगा। सोयाबीन एवं आगे की रबी अगाती फसलों का उत्पादन जल्दी प्राप्त होने से मण्डी में उसे जल्दी विक्रय कर किसान मण्डी में भीड़भाड़ से मुक्ति तथा उच्चतम भाव का लाभ ले सकते है।

 इस किस्म का बीज उत्तम अंकुरण क्षमता होने के कारण 75-80 किलो प्रति हेक्टेअर, कतार से कतार की दूरी 30 से.मी. (एक फीट ) रखने पर फसल की अवधि कम होने की स्थिति में भी इस किस्म में आदर्श परिस्थितियों में 22 क्वि. प्रति हेक्टेअर या इससे अधिक उत्पादन देने की क्षमता भी इस किस्म में है (आदर्श परिस्थितियों में)। 

इस किस्म में खरपतवार नियंत्रण उर्वरक प्रबंधन एवं खेतों में जलभराव वॉटर लीकिंग ना हो इसका पूरा ध्यान रखे ड्रेनेज मैनेजमेंट चैनल – पतली नालियां निकालकर इसे नियंत्रित करें दाना भरने की अवस्था में अधिकतम उत्पादन लेने हेतु इस किस्म में भी उचित नमी बनाए रखना आवश्यक है वर्षा में अधिक विलमंभ की दशा में सिंचाई की व्यवस्था शीघ्र करें, बोनी के समय सीड ड्रिल के साथ पावड़ी का उपयोग अवश्य करें।

जे.एस. 2034 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (soybean variety JS 2034) : दानों का आकार – गोलाकार, मध्यम बोल्ड, 100 दानों का वजन 11-12 ग्राम, दाने का प्रकार – पीला चमकदार, नाभिका ( हायलम ) काला, अंकुरण क्षमता – उत्तम 80-90 प्रतिशत तक, पौधे का प्रकार – बौनी किस्म 40-45 से.मी. परिमित वृद्धि (डिटरमिनेट प्लांट, कम फैलने वाला, सीधा प्लांट ( इरेक्ट ), पत्तियो का रंग – गहरा हरा, पत्ती का आकार – गोल अण्डाकार, रोएं – फलियाँ रोएंदार नहीं।आधे फूल आने की अवधि 34-36 दिवस ( अर्ली ) फूलों का रंग – सफेद, फली का रंग – पीला, फली का प्रकार -2-3 दाने की फलियाँ, फलियाँ चटकने की समस्या नहीं, आदर्श पौध संख्या – 6 लाख पौधे प्रति हेक्टेअर फसल की अवधि 85-88 दिवस, तेल की मात्रा 20-22 प्रतिशत, प्रोटीन का मात्रा 40-41 प्रतिशत। 

3. सोयाबीन किस्म जे.एस. 2029 (JS 2029)

कई वर्षों से किसान इस बात से परेशान हैं कि सोयाबीन की जे.एस. 335, जे.एस. 9305 के बाद विगत कई वर्षों से अधिक उत्पादन देने वाली, मध्यम अवधि की पानी के लिये सहनशील, मोटा (बोल्ड), उच्च गुणवत्ता वाला दाना, मजबूत जड़ तंत्र, उत्तम अंकुरण क्षमता, फली चटकने (शेटरिंग ) की समस्या न हो, कम बीज दर वाली, कीट व व्याधि हेतु बहुरोधी, सहनशील किस्म उन्हें कब मिलेगी?

किसानों का यह इन्तजार अब खत्म हो चुका है, क्योंकि वर्षों के गहन अनुसंधान एवं कड़े रिसर्च के बाद जवाहरलाल कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर ( J.N.K.V.V. ) मध्य प्रदेश द्वारा किसानों की उक्त अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सोयाबीन की नवीनतम किस्म जे.एस. 2029 हाल ही में जारी की है। जिसका नोटिफिकेशन क्रमांक एस.ओ. 1146(E) दिनांक 24.04.2014 है जो कि देश के मध्यक्षेत्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र के लिये अनुशंसित की गई है। यह (soybean variety) जे.एस. 335 से लगभग एक सप्ताह पूर्व या जे.एस.9305 के लगभग सामान्य परिस्थितियों में पककर तैयार हो जावेगी। 

उत्तम अंकुरण क्षमता एवं पौधे में फैलाव की अनुकूल स्थितियाँ होने के कारण यह सोयाबीन किस्म डिबलिंग (चुपाई हेतु ) 4×24 इन्च पर 10/12 कि.ग्रा. प्रति एकड़ बीज रखने पर आदर्श परिणाम, सीड ड्रिल से बोने की स्थिति में 70-75 किलो हेक्टेअर तथा लाईन से लाईन की दूरी 45 से.मी. ( डेढ़ फीट ) रखने पर आदर्श परिणाम। इस किस्म का उत्पादन 25-30 क्विंटल हेक्टेअर या आदर्श परिस्थितियों में इससे अधिक उत्पादन देने की असाधारण क्षमता इस किस्म में देखी गई है। मजदूरों की समस्या व मौसम की अनिश्चितता के कारण यह किस्म अच्छी ऊँचाई होने के कारण हारवेस्टर से काटने हेतु उपयुक्त किस्म है।

पूर्व में प्रचलित सोयाबीन किस्मों में कीट व्याधि का अत्यधिक प्रकोप, गुणवत्ता एवं उत्पादन में लगातार गिरावट / कमी को देखते हुए सोयाबीन की यह नवीनतम किस्म जे.एस. 2029 पुरानी किस्मों को विस्थापित कर उत्पादन एवं गुणवत्ता के नए मापदंड एवं नए आयाम बनाकर किसानों के लिये एक आदर्श विकल्प के रूप में शीघ्र प्रस्थापित हो जावेगी। 

जे.एस. 2029 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (soybean variety JS 2029) – दाने का आकार अण्डाकार, मोटा (बोल्ड), 100 दानों का वजन – 12-14 ग्राम, दाने का प्रकार – पीला, कम चमकदार (डल), नाभिका (हायलम) काला। अंकुरण क्षमता उत्तम 85-90 प्रतिशत तक। पौधे का प्रकार – मध्यम ऊँची किस्म, ऊचाई 53-60 से.मी., अर्ध परिमित (सेमी डिटरमिनेट) सीधा मध्यम फैलाव वाला पौधा (सेमी इरेक्ट), पत्ती का रंग – हरा, पत्ती का आकार तीखी संकरी, रोएं-फलियाँ रोएंदार (चिकनी नहीं), रोएं का रंग भूरा। आधे फूल आने की अवधि- 41-42 दिवस, फूल का रंग – सफेद, फली का रंग भूरा, दो से तीन दानों की फलियाँ, फलियाँ चटकने (शेटरिंग) की समस्या नहीं, आदर्श पौध संख्या 4 लाख पौधे प्रति हेक्टेअर, फसल की अवधि 93-96 दिवस तेल की मात्रा 20-22 प्रतिशत, प्रोटीन की मात्रा 40-42 प्रतिशत। 

4. सोयाबीन किस्म जे.एस. 9305 (JS 9305)

सोयाबीन की यह नवीनतम किस्म जे.एस. 93-05 अभी हाल ही में अधिसूचित होकर जारी की गई है। जिसका पंजीयन क्रमांक 296022 है। यह किस्म जे.एस. 335 की तुलना में लगभग एक सप्ताह पूर्व पककर तैयार हो जाती है। इसकी अवधि लगभग 85-90 दिवस है तथा इसकी उत्पादन क्षमता शीघ्र पकने वाली अन्य किस्मों की तुलना में सबसे अधिक है और जे.एस. 335 के बराबर है। अतः यह किस्म पूर्व में प्रचलित शीघ्र पकने वाली अन्य किस्मों को विस्थापित करने में सक्षम है। इस किस्म के दानों का आकार मध्यम, बोल्ड, रंग गहरा पीला आकर्षक चमकदार, काली नाभि, 100 दानों का वजन 12-13 ग्राम, अंकुरण क्षमता अत्यधिक 90 से 95 प्रतिशत तक। 

इस (soybean variety) की पत्तियाँ हरी, नुकीली लम्बी, फूलों का रंग बैंगनी तथा आधे फूल आने की अवधि 30-35 दिवस, फलियाँ बनने की अवधि 55 दिवस। अर्द्ध सीमित वृद्धि वाला मध्यम ऊँचाई का पौधा। तना व फलियाँ रोए रहित। फलियाँ पकने पर गहरे भूरे रंग की हो जाती है। फलियों में चार दाने वाली फलियों की संख्या काफी होती है। इसकी फली में चटखने की समस्या लगभग नहीं के बराबर होती है। पौध की ऊँचाई अच्छी होने से हार्वेस्टर से कटाई के लिए उपयुक्त यह किस्म जड़ सड़न रोग के लिए प्रतिरोधी पाई गई है।

सूखा तथा मौसम की अन्य प्रतिकूलता के प्रति यह किस्म सहनशील पाई गई है। बेक्टेरियल पाश्चुल व अन्य बिमारियों के प्रति भी यह किस्म सहनशील पाई गई। स्टेम फ्लाई (तना मक्खी) तथा गर्डल बीटल के अटैक इस किस्म में कम देखे गए हैं। तीखी संकरी पत्तियाँ (नेरो लीफ) होने से एवं कॉम्पेक्ट प्लांट होने के कारण हवा, प्रकाश व पौध संरक्षण औषधी छिड़काव के समय नीचे तक पहुँचते हैं जिससे कीट नियंत्रण अधिक आसान व काफी प्रभावशाली रहता है। शीघ्र पकने, सीधे बढ़ने के गुण के कारण यह किस्म अंतरवर्तीय फसल पद्धति के लिए एक दम उपयुक्त है।

प्लांट के फैलाव / ब्रांचिंग व अंकुरण क्षमता बहुत अच्छी होने से डिबलिंग मेथड (चुपाई) (6X18) पद्धति से लगाने हेतु यह एक श्रेष्ठ किस्म है तथा कम पानी एवं हल्की जमीनों में भी इस किस्म में अच्छा उत्पादन देने की असाधारण क्षमता है।

जे.एस. 9305 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (soybean variety JS 9305) इस जाति में जल्दी कटाई हो जाने के कारण खेत में उपलब्ध वर्षाकाल की नमी का उपयोग करते हुए असिंचित अवस्था में भी रबी फसलों की सूखा निरोधक किस्में ली जा सकती हैं साथ ही जल्दी कटाई के कारण खेत खाली होने की स्थिति में अगाति (अर्ली) रबी की फसलें आलू, प्याज, लहसुन, मटर, सुजाता गेहुँ लेने वाले किसानों के लिए भी यह किस्म एक वरदान है।

25-30 किलो प्रति एकड़ बीज दर एवं कतार से कतार की दूरी 18 इंच रखने पर श्रेष्ठ उत्पादन औसत 30-35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक फसल की अवधि कम होते हुए भी आदर्श परिस्थितियों में लिया जा सकता है। इस किस्म में खरपतवार नियंत्रण एवं खेतों में पानी भरने की स्थिति (वाटर लॉकिंग) न हो इसका पूरा ध्यान रखें।

ड्रेनेज मेनेजमेंट – चेनल पतली नालियाँ निकालकर इसे नियंत्रित करें तथा दाना भरने की अवस्था में उचित नमी बनी रहना आवश्यक है। वर्षा में विलम्ब की दशा में सिंचाई की व्यवस्था शीघ्र करें। 7 दिवस से अधिक विलम्ब (स्ट्रेस) सिंचाई में नहीं होना चाहिये। बोनी के समय सीडड्रिल के साथ पावडी का उपयोग अवश्य करें। 

5. सोयाबीन किस्म जे.एस. 335 (JS 335)

पूरे भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय एवं सर्वाधिक क्षेत्र पर उत्पादन ली जाने वाली यह किस्म अपने अंकुरण एवं उत्पादन क्षमता एवं अपने गुणों के कारण हर किसान के खेत एवं दिल पर अपना कब्जा जमा चुकी है। इसका दाना पीला, चमकदार, अत्यधिक अंकुरण क्षमता 90-95 प्रतिशत तक, बैंगनी फूल, अर्द्ध असीमित वृद्धि, फलियाँ चटखने के प्रति सहनशील।

बेक्टेरियल पश्चुल के प्रति ड्रिबलिंग मेथड से लगाने के लिए श्रेष्ठ किस्म (9X18) इन्च की पद्धति से लगाने पर श्रेष्ठ परिणाम। इस (soybean variety) की उत्पादन क्षमता 30-35 क्विटल प्रति हेक्टेयर फसल की अवधि 100-105 दिवस।

जे.एस. 335 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (soybean variety JS 335) लम्बी अवधि की फसल लेने वाले किसानों के लिए तथा देर तक वर्षा होने की स्थिति में एक श्रेष्ठ किस्म। मध्य क्षेत्र के लिए अनुशंसित। 

6. सोयाबीन किस्म आर.वी.एस. 2001-4 (RVS 2001-4)

राजमाता सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय द्वारा हाल ही में जारी सोयाबीन की इस नवीनतम किस्म ने अपने पहले ही उत्पादन वर्ष में इसके दर्शाये गये गुणों के अनुसार किसानों को चमत्कारी परिणाम दिये हैं। सेमिडिटरमिनेट (अर्द्धपरिमित) सीधा फैलाव वाला पौधा हायलम का रंग ब्राउन (भूरा), फूलों का रंग सफेद, पौधे की ऊँचाई 50-60 से.मी., फसल की अवधि लगभग 93 दिवस।

इस (soybean variety) में तेल की मात्रा 21.5 प्रतिशत प्रोटीन 42 प्रतिशत औसत उत्पादन लगभग 25 क्विंटल प्रति हेक्टेअर, मजबूत जड़ तंत्र होने से जड़ सड़न, पीला मोजेक रोग, फलियाँ रोएंदार होने से गर्डल बीटल, सेमिलूपर आदि के लिए सहनशील, फलियों में चटकने की समस्या नहीं। जल जमाव व भराव की स्थिति में अन्य किस्मों की तुलना में अधिक सहनशील किस्म। अधिक फैलाव वाला मजबूत जड़ तंत्र होने से सूखा पड़ने की स्थिति में पौधे की नमी बनाए रखता है जिससे इस किस्म में सूखा निरोधक जाति के गुण भी पाये जाते हैं। 

आर.वी.एस. 2001-4 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (RVS 2001-4)अत्यधिक अंकुरण क्षमता 90/95 प्रतिशत तक व फैलाव वाला पौधा होने व दाना छोटा होने से कम बीज दर में अधिकतम उत्पादन व डिबलिंग हेतु सर्वश्रेष्ठ किस्म। इस किस्म ने पौधों की ऊँचाई अच्छी होने से हारवेस्टर से काटने हेतु उपयुक्त। 

7. सोयाबीन किस्म एन.आर.सी. 86 (NRC 86)

राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केन्द्र (NRCS) द्वारा वर्षों के गहन अनुसंधान के पश्चात सोयाबीन की यह नवीनतम (soybean variety) किस्म गत वर्ष में प्रसारित की है। हल्की हरे रंग की गोल चौड़ी पत्तियाँ, बैंगनी रंग के फूल, फूल आने की अवधि लगभग 45 दिवस, दाना आकर्षक मध्यम आकार का चमकदार। अवधि लगभग 95 दिवस और औसत उत्पादन लगभग 20.25 क्विंटल हेक्टेअर गर्डल बीटल एवं तना मक्खी हेतु प्रतिरोधक किस्म दो से तीन दाने की फलियाँ, फलियों में चटकने की समस्या नहीं।

एन.आर.सी. 86 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (soybean variety NRC 86) इस किस्म के पौधों की ऊँचाई अधिक लगभग 75.80 से.मी. होने से व अंकुरण क्षमता अच्छी होने से कम बीज दर पर अधिक उत्पादन देने की क्षमता, डिबलिंग हेतु उपयुक्त किस्म। इस किस्म के पौधों की ऊँचाई अच्छी होने से हारवेस्टर से कटाई हेतु उपयुक्त। 

8. सोयाबीन किस्म जवाहर जे.एस. 2069 (JS 2069)

जवाहरलाल कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर ( J.N.K.V.V. ) मध्य प्रदेश द्वारा किसानों के लिए सोयाबीन की चमत्कारी किस्म जे.एस. 2069 (soybean variety JS 2069) हाल ही में जारी एक नवीनतम किस्म है। यह एक शीघ्र पकने वाली प्रजाति है, जो 94 दिन में पक जाती है विपरीत परिस्थिति में भी इसमें अधिक उपज देने की क्षमता है। यह बहुप्रतिरोधी प्रजाति है, जो जैविक व्याधियों जैसे पीला मोजैक, चारकोल सड़न, झुलसन, जीवाणु धब्बा, पर्णीय धब्बे, तनामक्खी, चक्रभृग एवं पत्तिभक्षकों के लिए रोधी एवं सहनशील है।

इसमें अंकुरण एवं दीर्घजीवी क्षमता उत्तम है। शीघ्र पकने के कारण यह द्विफसली प्रणाली के लिए अतिउपयुक्त है। यह अर्ध सीधे बढ़ने वाली प्रजाति है अत: अन्तरवर्तीय फसल प्रणाली के लिए भी उपयुक्त है।

जवाहर जे.एस. 2069 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (soybean variety JS 2069) इस किस्म के दाने चमकदार, 100 दानों का वजन 10-11 ग्राम, फूलों का रंग सफेद, फूल आने की अवधि 40 दिन, फलियाँ भूरे रंग की, चटकने की समस्या नहीं। इस किस्म में अधिक वर्षा व बीमारी के प्रति विशेष प्रतिरोधकता व उच्च उत्पादन क्षमता होने के कारण यह नवीन किस्म किसानों के लिये वरदान सिद्ध होगी। 

9. सोयाबीन किस्म जे.एस. 2098 (JS 2098)

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जे.एन.के.वी.वी.) मध्यप्रदेश द्वारा पुरानी सोयाबीन किस्मों के श्रेष्ठ विकल्प के रूप में किसानों की आवश्यकता एवं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए निरन्तर गहन रिसर्च के पश्चात सोयाबीन की नवीनतम किस्म जे.एस. 2098 (soybean variety JS 2098) जारी की है, सोयाबीन की यह किस्म बोनी हेतु म.प्र., राजस्थान, गुजरात, बुन्देलखण्ड, मराठवाड़ा एवं विदर्भ क्षेत्र हेतु अनुशंसित की गई है, इसका नोटिफिकेशन क्रमांक एस.ओ. 1379 (E- 27-3-2018) है। 

सोयाबीन की यह नवीन किस्म जे.एस. 335 से पहले व सोयाबीन जे.एस. 9305 के लगभग पककर तैयार हो जायेगी। हल्की, सामान्य एवं भारी जमीनों में तथा सामान्य एवं विपरीत परिस्थितियों एवं मौसम में भी इस किस्म में अत्यधिक उत्पादन देने की अद्भुत क्षमता इस किस्म में देखी गई है।

उत्तम अंकुरण क्षमता एवं पौधे में फैलाव की अनुकूल स्थितियाँ होने के कारण 75 किलो प्रति हैक्टेअर बीज दर रखने एवं 14 से 16 इंच कतार से कतार की दूरी रखने पर आदर्श परिणाम। मजदूरों की समस्या व मौसम की अनिश्चितता के कारण यह किस्म ऊँचाई ठीक होने के कारण हारवेस्टर से कटाई हेतु भी एक उपयुक्त किस्म है। पूर्व में प्रचलित सोयाबीन किस्मों में कीट – व्याधि का अत्यधिक प्रकोप तथा उत्पादन एवं गुणवत्ता में लगातार आ रही गिरावट / कमी को देखते हुए सोयाबीन की यह नवीनतम किस्म जे.एस. 2098 सोयाबीन की पुरानी किस्मों को विस्थापित कर उत्पादन एवं गुणवत्ता के नए मानदंड एवं आयाम बनाकर किसानों के लिए एक आदर्श सोयाबीन किस्म का विकल्प बनकर शीघ्र प्रस्थापित हो जावेगी। 

जे.एस. 2098 के प्रमुख गुण (Character)

प्रमुख गुण (soybean variety JS 2098) दाने का आकार: गोलाकार, मध्यम (बोल्ड) 100 दानों का वजन 10.2 ग्राम, दाने का प्रकार पीला, चमकदार, नाभिका (हायलम) काला, अंकुरण क्षमता 80-90 प्रतिशत, पौधे का प्रकार मध्यम ऊँची किस्म, ऊँचाई लगभग 46 से 55 से.मी., अर्ध परिमित (सेमी डिटरमिनेट) यानी सीधा मध्यम फैलाव वाला पौधा (सेमी इरेक्टर), पत्ती का आकार तीखी – सकरी फलियाँ रोयेंदार (चिकनी नहीं) रोएं एवं फली का रंग भूरा, आधे फूल आने की अवधि लगभग 40-42 दिवस, फूलों का रंग सफेद, दो से तीन दाने की फलियाँ, फलियाँ चटकने की समस्या (शेटरिंग) नहीं, आदर्श पौध संख्या 4 लाख पौधे प्रति हैक्टेअर, फसल की अवधि लगभग 94 दिवस, दानों में तेल की मात्रा 19.30 प्रतिशत, प्रोटीन प्रतिशत 40.9।

अधिकतम उत्पादन क्षमता व्यवहारिक तरीकों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 25-30 क्विंटल प्रति हैक्टेयर एवं उससे भी अधिक, आदर्श परिस्थितियों में 1 बायोटिक स्ट्रेस जैसे पीला मौजेक वायरस, चारकोल रॉट, ब्लाईट, बैक्टेरियल पाश्चुल, लीफ स्पॉट बीमारियों के लिए तथा मजबूत जड़तंत्र के कारण अधिक वर्षा की स्थिति में जड़ सड़न सम्बन्धी बीमारियों के लिए प्रतिरोधी किस्म एवं स्टेम बोरर, स्टेम फ्लाय एवं अन्य कीटों के प्रति सहनशीलता के गुण के कारण कृषक इस नवीन किस्म को लगाने हेतु निश्चित ही आकर्षित होंगे। 

निष्कर्ष

उपरोक्त समस्त फसलों एवं बीजों का विवरण / विशेषताएं आदर्श कृषि कार्यमाला एवं आदर्श परिस्थितियों के अनुसार प्राप्त जानकारी के आधार पर तथा कृषकों से प्राप्त व्यावहारिक / वास्तविक आँकडों के आधार पर दिये गये हैं। इन आदर्श स्थितियों में परिवर्तन होने पर उपरोक्त विशेषताओं / परिणाम के आँकडों में भी परिवर्तन हो सकता है। 

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