चने की उन्नत किस्में और उनका विवरण

चना भारत की दलहनी फसलो में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत में चने को दालों का राजा कहा जाता है।
चने में उपलब्ध पोषक तत्व निन्म अनुसार है (प्रति 100 ग्राम)

  • 11 ग्राम पानी
  • 21.1 ग्राम प्रोटीन
  • 4.5 ग्रा. वसा
  • 61.5 ग्रा. कार्बोहाइड्रेट
  • 149 मिग्रा. कैल्सियम
  • 7.2 मिग्रा. लोहा
  • 0.14 मिग्रा. राइबोफ्लेविन
  • 2.3 मिग्रा. नियासिन

भारत में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एवं किसानों द्वारा परखी गई चने की उन्नत किस्में व उनका विवरण निम्नानुसार है

1. विजय | Vijay

चने की यह किस्म देखने में चाफे जैसी दिखती है लेकिन भारत में इस किस्म की सर्वाधिक उत्पादन क्षमता – सिंचित खेती में 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक तथा असिंचित क्षेत्रों में भी लगाने के लिए उपयुक्त मानी जाती है

असिंचित खेती में उत्पादन क्षमता 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है इस किस्म के पौधों की जड़े ज्यादा गहरी जाने से यह सूखा सहन करने में समर्थ है

  • चना विजय बोनी का समय 
    यह किस्म जल्दी एवं देरी दोनों समय में बोई जा सकती है, इस किस्म का बोनी का समय अक्टूबर से नवंबर में के मध्य होता है इस दौरान इसकी बुवाई करना अच्छा माना जाता है 
  • फसल पकने का समय 
    यह किसी अन्य किस्मों की अपेक्षा जल्दी पकने वाली कम समय की फसल है 
    सिंचित खेती में 105 दिन में तथा असिंचित खेती में 90 दिन में फसल आने की संभावना होती है तथा इसमें फूल आने की अवधि 35 दिनों की होती है
  • बीजों की मात्रा 
    बीजों की मात्रा 1 एकड़ में 26-27 प्रति किलो प्रयोग में लाई जा सकती है 
  • प्रकृति 
    इस जाति में शाखीय वृद्धि अधिक होने से पौधे की ऊंचाई अधिक नहीं बढ़ती है अधिक मात्रा में पानी व खाद देने पर भी इसकी ऊंचाई ज्यादा नहीं होती है लेकिन उत्पादन में पर्याप्त मात्रा में वृद्धि होती है इसके दानों का रंग पीला व आकार मध्यम और सलदार होता है

2. विशाल | Vishal

चना विशाल इसके नाम के अनुसार विशाल आकार व विशाल गुणों वाली सर्वश्रेष्ठ किस्म है यह चनों का राजा कहे जाने योग्य सर्वगुण संपन्न किस्म है 

  • बोनी का समय 
    चना विशाल बोनी का समय 20 अक्टूबर से 10 नवंबर तक होता है इस दौरान इसकी बुवाई की जा सकती है 
  • फसल पकने का समय 
    फसल पकने की अवधि 110 से 115 दिन होती है तथा फूल 40 से 45 दिनों में आ जाते हैं 
  • बुवाई में लगने वाले बीजों की मात्रा 
    बीजों की मात्रा 1 एकड़ में 26 से 28 प्रति किलो तक प्रयोग में लाई जा सकती है 
  • उत्पादन क्षमता 
    चना विशाल की अधिकतम उत्पादन क्षमता 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है बेहतर किस्म होने के कारण 300 से 400 ₹ प्रति क्विंटल अधिक बाजार भाव मिलने के साथ-साथ मंडी में सर्वाधिक मांग पर बिकने वाली एकमात्र किस्म चना विशाल है
  • प्रकृति
    इस किस्म का पौधा आकर्षक मध्यम ऊंचाई हरी चौड़ी पत्तियों व पर्याप्त शाखाओं वाला होता है

3. (दिग्विजय) फुले 9425-5 | Phule 9425-5

फुले कृषि विश्वविद्यालय राहुरी द्वारा विकसित हाल ही में प्रचलित चने की उन्नत किस्म पूर्व में बताई गई विजय व विशाल किस्मों से लगभग 20% अधिक उत्पादन क्षमता रखती है

  • बोनी का समय
    चना दिग्विजय बोनी का समय अक्टूबर से नवंबर के मध्य में होता है इस दौरान इसकी बुवाई आसानी से की जा सकती है
  • फसल पकने का समय
    इस किस्म के चने की फसल पकने की अवधि 90 से 105 दिन की होती है इस दौरान फसल अच्छी होती है
  • बुवाई में लगने वाले बीजों की मात्रा
    इस किस्म में बुवाई के लिए बीजों की मात्रा 30 किलो प्रति एकड़ की दर से (30 X 10) सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाना चाहिए
  • उत्पादन क्षमता
    इस किस्म की अधिकतम उत्पादन क्षमता 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है
  • प्रकृति
    किस्म का पौधा अधिक सहनशील, दाना पीला बोर्ड, आकर्षक और मध्य क्षेत्र हतु अनुशंसित किस्म का होता है

4. जाकी-9218 | Jaki-9218

पंजाबराव कृषि विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2008 में मध्य क्षेत्र के लिए रवि में बोनी हेतु विकसित की गई यह एक अर्ली किस्म होने से सूखे की स्थिति में पानी की कमी में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है

  • बोनी का समय
    अक्टूबर माह में प्रथम से दूसरे सप्ताह में बोनी करने पर आदर्श परिणाम व्यवहारिक परिस्थितियों में कृषकों द्वारा प्राप्त किए जा सकते हैं
  • फसल पकने का समय
    इस किस्म के चने की फसल पकने का समय 93 से 120 दिन है परिपक्वता अवधि के 15 से 20 दिन के बाद भी चने के फूटने, गिरने की समस्या नहीं होती है
  • बुवाई में लगने वाले बीजों की मात्रा
    चना जॉकी की किस्म की अच्छी अंकुरण क्षमता है एवं फैलाव वाले गुणों के कारण इस चने की किस्म की बीज दर 85 से 100 किलो प्रति हेक्टेयर में की जा सकती है
  • उत्पादन क्षमता
    इस किस्म की उत्पादन क्षमता 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से भी अधिक देखी गई है, इस किस्म ने अपनी लोकप्रियता व विशिष्ट पहचान बना ली है
  • प्रकृति
    इस किस्म के पौधे अर्थ फैलाव दाना बोल्ड, दाने का रंग पीला सुनहरा, पौधे अच्छे फैले हुए आकार का तथा पौधे की ऊंचाई 34 सेंटीमीटर, फूलों की संख्या काफी अधिक, फूलों का रंग गहरा गुलाबी, फली का आकार बड़ा व इसके 100 दानों का वजन 28.5 ग्राम तक होता है

5. (फुले विक्रम) फुले.जी-08108 | Phule.G-08108

आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है इस सिद्धांत का आदर्श उदाहरण चने की अंतरराष्ट्रीय स्तर की किस्म फुले विक्रम है जोकि महात्मा फूले कृषि विद्यापीठ राहुरी ने जुलाई 2017 में मध्य प्रदेश वह महाराष्ट्र के लिए यह चने की उन्नत किस्म जारी है 

जो कि गजट में नोटिफाई भी हो चुकी है अपनी अच्छी उचाई के कारण हाईवेस्टर से काटने के लिए काफी अच्छी सिद्ध होगी और हाथो से कटाई से होने वाली मजदूरों की समस्या से किसानों को मुक्ति दिलाएगी, जिससे समय व कटाई की लागत में भारी बचत होगी। 

  • बोनी का समय
    अक्टूबर माह के पहले हफ्ते के बाद से इस किस्म के चने की बुवाई शुरू की जा सकती है
  • फसल पकने का समय
    यह किस्म जल्दी पकने वाली प्रकृति की किस्म है इसकी अवधि लगभग 105 से 110 दिन की होती है इतने समय में फसल पक कर तैयार हो जाती है
  • बुवाई में लगने वाले बीजों की मात्रा
    चना जाकी 92-18 बीज दर 30 किलो एकड़ या 75 किलो हेक्टेयर व लाइन से लाइन की दूरी 16 इंच, पौधे से पौधे की दूरी 4 इंच रखने पर आदर्श परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं इसके उत्पादित 100 दानों का वजन लगभग 21 ग्राम तक होता है
  • उत्पादन क्षमता
    चने की यह नवीन किस्म (फुले विक्रम) पूर्व में प्रचलित किस्म से 10 से 12% अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती है
  • प्रकृति
    इस किस्म का दाना काफी आकर्षक बोल्ड व खाने में अत्यंत स्वादिष्ट होने के कारण बाजार में भाव भी अधिक प्राप्त होता है व चने की परंपरागत किस्मों से एकदम हटकर यह एक नई किस्म के चने के उत्पादन में नई दिशा व नई तकनीक का प्रारंभ है

6. (गणगोर) जी.एन.जी-1581 | G.N.G-1581

चने की अत्यंत उत्पादन देने वाली यह किस्म राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय श्रीगंगानगर ने विकसित की है इसे भारत सरकार द्वारा चने की नोटिफाइड किस्म के रूप में भी जारी किया जा चुका है

  • बोनी का समय
    अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह के बाद से ही इसकी बुवाई शुरू करके अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं
  • फसल पकने का समय
    इसकी अवधि 100 से 115 दिन की है तथा फूल आने की अवधि लगभग 50 दिन की है
  • बुवाई में लगने वाले बीजों की मात्रा
    इस किस्म में बीज दर 30 से 35 किलो प्रति एकड़ रखने तथा लाइन से लाइन की दूरी 14 इंच रखने व कीट, उर्वरक व सिंचाई प्रबंध व्यवस्था सही होने पर आकर्षक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं
  • उत्पादन क्षमता
    व्यवहारिक परिस्थितियों में कृषकों द्वारा इस किस्म से 14 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त कर एक नया रिकॉर्ड बनाया गया है
  • प्रकृति
    इस किस्म का पौधे के दानों का रंग आकर्षक पीला व 100 दानों का वजन 12.7 से 24.3 ग्राम, पौधों की ऊंचाई 40 सेंटीमीटर से 66 सेंटीमीटर तक अर्ध फैलाव वाला होता है इन सब गुणों के कारण यह किस्म किसानों के मध्य अपना एक लोकप्रिय स्थान बना चुकी है

7. एच.सी-5 | H.C-5

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के करनाल स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ वी.एस लाठर द्वारा विकसित चने की यह एक अद्भुत किस्म है जो अन्य चने की किस्मों से बिल्कुल अलग है तथा यह किस्म मैकेनिकल हाईवेस्टर से कटने वाली विश्व की पहली किस्म है 

  • बोनी का समय
    इसे गेहूं की तरह नवंबर माह में तापमान कम होने पर बोया जाता है हालांकि 25 अक्टूबर से 15 नवंबर तक इसकी बुवाई करें जब तापमान लगभग 27° या इससे कम हो
  • फसल पकने का समय
    इस किस्म के पौधे में फूल आने की अवधि लगभग 50 से 55 दिन की होती है, पकने की अवधि लगभग 120 दिन की होती है 
  • बुवाई में लगने वाले बीजों की मात्रा
    इस किस्म के बीज 30 से 35 किलो प्रति एकड़ या 80 किलो प्रति हेक्टेयर व लाइन से लाइन की दूरी 12 से 14 इंच रखने पर आदर्श परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं 
  • उत्पादन क्षमता
    पूर्व में बताई गई किस्मों की अपेक्षा अधिक उत्पादन देगी पर्याप्त मात्रा में बीज उपचार खरपतवार नियंत्रण, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन तथा पाले की सुरक्षा देने से उच्च उत्पादन परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं 
  • प्रकृति
    इस किस्म का दाना हल्का भूरा व पीला सुनहरा होता है, 100 दिन का वजन लगभग 16 ग्राम, फूलों का रंग बैंगनी होता है पौधों की ऊंचाई लगभग 90 से 110 सेंटीमीटर और पौधा सीधा बढ़ने वाला व सघनता वाले स्वभाव का होता है 

8. जे.जी-12 | J.G-12

चने की यह नविन किस्म जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में विकसित की गई है व भारत सरकार द्वारा इसे उत्पादन हेतु notified कर जारी किया जा चुका है

  • बोनी का समय
    इस किस्म के बोनी का समय 15 अक्टूबर से नवंबर माह की शुरूआत तक होता है
  • फसल पकने का समय
    चने की यह कम समय की किस्म है इसकी अवधि 100 से 115 दिन की होती है
  • बुवाई में लगने वाले बीजों की मात्रा
    इस किस्म के बीजो की दर 30 से 35 किलो प्रति एकड़ व लाइन से लाइन की दूरी 14 इंच तक रखी जा सकती है
  • उत्पादन क्षमता
    इसका उत्पादन व्यवहारिक रूप से किसानों द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 14 क्विंटल प्रति एकड़ तक लिया गया है पानी की कमी या भूमि सिंचित होने दोनों ही परिस्थितियों में अच्छा उत्पादन देने में यह किस्म सफल रही है
  • प्रकृति
    इसके दानो का रंग भूरा व आकार मध्यम और एक जैसे शाखाएं प्रचुर मात्रा में फैली होती है

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9. काबुली (डॉलर) चने की उन्नत किस्म पि.के.वि-2 | P.K.V-2

पि.के.वि-2 काबुली चने(डॉलर चने) की एक उन्नत किस्म है जिसे पंजाबराव कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई है 

  • बोनी का समय
    वर्ष 2001 में माह अक्टूबर से रबी सीजन में बोने का समय उत्तम निर्धारित किया गया है
  • फसल पकने का समय
    चने कि यह जल्दी पकने वाली किस्म है, इसकी अवधि 91 से 113 दिन तक की होती है वर्षा की कमी में या केवल एक सिंचाई देने पर भी सूखे की स्थिति होने पर भी यह किस्म उत्तम परिणाम देने में सक्षम है
  • बुवाई में लगने वाले बीजों की मात्रा
    इस किस्म में लाइन से लाइन की दूरी 18 इंच (45 X 10 सेंटीमीटर) रखने व बीज दर 110 से 115 किलो हेक्टेयर रखने तथा एक से दो खिंचाई देने पर भी आदर्श परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं
  • उत्पादन क्षमता
    इस किस्म का अपनी अधिकतम उत्पादन क्षमता व सूखा निरोधक किस्म होने व जल्दी आने के गुणों के कारण एक विशिष्ट स्थान है व पैदावार 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है
  • प्रकृति
    इस किस्म के पौधे की ऊंचाई लगभग 56 सेंटीमीटर, अधिक फैलाव वाली किस्म व फूलों का रंग सफेद, फली व दानो का आकार बोल्ड होता है
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