फलों के बगीचे की देखरेख में किन बातों का रखें ध्यान

नए फलों के पौधों को बगीचे में लगाने के पश्चात उनकी अच्छी प्रकार से देखरेख की आवश्यकता होती है।

फलों के बगीचे की देखरेख में निम्न कार्य शामिल हैं

सिंचाई की व्यवस्था

नवीन फलों के पौधों में पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है ना तो सिंचाई अधिक होनी चाहिए और ना ही कम, इससे पौधे को नुकसान हो सकता है।

रोपाई का समय

जुलाई-अगस्त के दौरान रोपाई की जानी चाहिए, मानसून शुरू होने का समय ही रोपाई के लिए उचित है तो इस दौरान ही रोपाई की जानी चाहिए और फलों के नए बाग लगाने के वैज्ञानिक तरीके के आधार पर ही तैयारी करना चाहिए।

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सिंचाई की पद्धतियां

फलों के बगीचे की देखरेख में सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण है इसकी कुछ प्रचलित विधियां है किंतु हमें चयन ऐसी विधि का करना चाहिए जिसमें सिंचाई का खर्च कम हो।

  • बहाव पद्धति : इस विधि का प्रयोग तभी किया जाता है जब फल वृक्ष बड़े हो जाते हैं उनकी जड़े पूरे बगीचे में फैल जाती है और यदि अधिक मात्रा में पानी की व्यवस्था हो तभी यह पद्धति उपयोग में लाई जा सकती है इस पद्धति में आवश्यकता अनुसार क्यारियां बनाकर सिंचाई की जाती है
  • थाल पद्धति : इस पद्धति में पौधों के चारों ओर थाल बना दिया जाता है थाल हमेशा गोलाकार बनाया जाना चाहिए, पौधों की दो कतारों के बीच में नाली बनाई जाती है और थालो को इन नालियों से माध्यम से जोड़ दिया जाता है जिससे कि समान मात्रा में सिंचाई बगीचे के सभी पौधों में हो सके
  • अंगूठी पद्धति : इस पद्धति का प्रयोग जब पौधे छोटे हों तभी किया जाता है पौधे के चारों ओर अंगूठी नुमा आकृति बनाई जाती है और एक कतार से सभी वृक्षों के आसपास नालियां बनाकर इन अंगूठियों को जोड़ दिया जाता है इस विधि से पर्याप्त मात्रा में सिंचाई की जा सकती है
  • ड्रिप सिंचाई पद्धति : यह एक आधुनिक व नवीन पद्धति है जहां भी पानी की कमी होती है वहां इस पद्धति का प्रयोग किया जाता है इसके अनुसार जिस क्षेत्र में पौधो की जड़ों में पर्याप्त रूप से पानी दिया जाता है इसमें प्लास्टिक के पाइपों में से कम दबाव का पानी प्रभावित किया जाता है इन पाइपों में प्रत्येक पौधे के पास एक वॉल्व लगा होता है जिसमें पानी निकलने की मात्रा प्रतिदिन पौधे की आवश्यकता अनुसार रखी जा सकती है इस विधि में कम से कम पानी की आवश्यकता होती है
  • स्प्रिंकलर पद्धति : इस पद्धति के अनुसार थोड़ी थोड़ी दूर पर स्प्रिंकलर लगा दिए जाते हैं जिन्हें पाइपों के माध्यम से जोड़ दिया जाता है तथा स्टैंड सहायता से स्प्रिंकलर को ऊपर उठा दिया जाता है और इसके माध्यम से फलों के बगीचों में चारों ओर पानी देने का काम आसानी से हो सकता है,यह पद्धति नवीन तकनीकों में से एक है और काफी लोकप्रिय भी है, परन्तु बड़े और ऊंचे पेड़ो वाले बगीचे के लिये कारगर नहीं है। 

बगीचे में खरपतवार से बचाव

नए फलों के पौधों को खरपतवार से ज्यादा नुकसान पहुंचता है, खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक है कि समय-समय पर निराई गुड़ाई करते रहे और आवश्यकता पड़ने पर ही खरपतवार नाशक दवाईओ का प्रयोग करें।

खाद एवं उर्वरक

फलों के बगीचे की देखरेख अच्छी तरह होना जरूरी है जिससे कि वह वृद्धि कर सकें, उर्वरक एवं खाद कितनी मात्रा में दिया जाना चाहिए यह भूमि की उर्वरता तथा पौधों की किस्मों पर निर्भर करता है

यह आवश्यक है कि वर्ष में एक बार वर्षा ऋतु के समय पकी हुई गोबर खाद अथवा कंपोस्ट खाद निश्चित मात्रा में दी जानी चाहिए, यदि पौधे नहीं बढ़ पा रहे हैं तो फरवरी-मार्च के दौरान नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए हमेशा खाद एवं उर्वरक देने के पश्चात हल्की सिंचाई की व्यवस्था की जाना चाहिए।

बगीचे की देखरेख में कटाई-छटाई का महत्व

प्रारंभिक अवस्था में पौधों को आकार देने के लिए कटाई एवं छटाई जरूरी होती है सदाबहार पौधे जो कि एक जैसे होते हैं उन्हें ज्यादा कटाई-छटाई की आवश्यकता नहीं होती है

लेकिन पर्णपाती (पतझड़ी) पौधे जैसे सेब, नाशपाती, अंगूर आदि को निश्चित आकार देने के लिए अधिक काट छांट की आवश्यकता होती है यह कार्य उचित समय एवं सही तरीके से किया जाना आवश्यक है।

पौधो के लिए शेड का प्रबंध करना

तेज़ धुप अथवा लू से बचाव के लिए प्रत्येक पौधे के आसपास छाया आवश्यक है इसके लिए
बांस की चटाई का घेरा, घांस की छांव तथा खजूर की पत्तियों आदि से बनाई जा सकती है साथ ही हरे जालीदार कपड़े की नेट भी लगाई जा सकती है जिससे पौधों को पर्याप्त मात्रा में छांव मिलती रहे, छाया या शेड लगाते समय यह ध्यान रखें कि छोटे पौधो को सुबह की धूप लग सके और दोपहर की धूप से बचाव हो सके। 

पौधों को सहारा देना

नए लगाए गए पौधों को बांस या लकड़ी की सहायता से सहारा देकर सीधे खड़े करना चाहिए, जिससे तेज हवा में भी यह टूट ना पाए कमली पौधों को इस तरह की सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

पुनः रोपण

फलो के बगीचे में लगाए गए पौधों में यदि कोई पौधा किसी कारणवश मर जायें तो उनके स्थान पर मार्च या जुलाई में नए पौधे लगा देना चाहिए।

कीटनाशक दवाई का छिड़काव

फलों के बगीचे में समय-समय पर सभी पौधों की अच्छे से देखभाल की जाना चाहिए इस दौरान यदि पौधे में कोई बीमारी या कीटों का प्रकोप दिखाई दे तो जरूरी दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए जिससे पौधे में बीमारी ना हो और कीटों का प्रकोप ना लगे।

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